धमतरी की वनोपज मंडी में औषधीय उत्पादों के कारोबार को मिल रहा विस्तार

श्यामतराई मंडी में स्थानीय सहित आसपास के जिलों से पहुंच रहे वनोपज संग्राहक और स्व-सहायता समूह

धमतरी। धमतरी जिले की पहचान और समृद्ध व्यापारिक विरासत से जुड़ी श्यामतराई स्थित कृषि उपज मंडी में वनोपज एवं अन्य औषधीय उत्पादों के क्रय-विक्रय की परंपरा को नए सिरे से प्रोत्साहन मिल रहा है। यहां प्रत्येक सोमवार को लगने वाली वनोपज मंडी में धमतरी सहित आसपास के जिलों के संग्राहक, किसान और स्व-सहायता समूह अपने उत्पाद लेकर पहुंच रहे हैं। इससे परंपरागत वनोपज व्यापार को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका और स्वरोजगार के अवसरों को विस्तार मिलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

19 अक्टूबर को अवकाश होने के कारण वनोपज मंडी में कारोबार नहीं हुआ था। इसके स्थान पर बुधवार, 21 अक्टूबर को क्रय-विक्रय किया गया। इसके बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को मंडी में फिर से वनोपज एवं औषधीय उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई। आज दो व्यापारियों ने इन उत्पादों की खरीदी की, जिनका कुल मूल्य 60 हजार रुपये से अधिक रहा। यह गतिविधि मंडी में परंपरागत वनोपज कारोबार की संभावनाओं और व्यापारियों की रुचि को दर्शाती है।
मंडी में कांकेर जिले के ग्राम गितपहर से पहुंचे श्री घनश्याम जैन ने बताया कि वे हर्रा, बैचांदी, कयाफल, निशोध जड़ी और रागी सहित अन्य उत्पाद बेचने पहली बार यहां आए हैं। उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से इस मंडी की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि यहां अपने वनोपज उत्पादों को बेचने का अनुभव अच्छा रहा है।
इसी तरह कोंडागांव जिले के माकड़ी से किरण महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पहली बार अपने उत्पाद लेकर श्यामतराई पहुंचीं। समूह की महिलाओं ने केउ कांदा, मालकामनी, नागरमोथा, हर्रा, बेहड़ा, जामुन की पत्तियां, कड़ु कांदा और मिसोध जड़ जैसे उत्पाद बिक्री के लिए प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ उत्पादों का उपयोग पारंपरिक औषधी तैयारियों में किया जाता है। समूह की इस पहल से महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्थानीय उत्पादों के विपणन की संभावनाएं भी सामने आती हैं।
बालोद जिले के मुड़खुसरा गांव से आए श्री शम्भुराम ठाकुर ने बताया कि वे हर्रा, इरानी अकलतरा और अश्वगंधा की जड़ सहित अन्य वनोपज लेकर पहुंचे थे। उन्होंने हर्रा के 10 किलोग्राम उत्पाद को 18 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा। श्री ठाकुर ने उम्मीद जताई कि मंडी में कारोबार बढ़ने के साथ आने वाले समय में वनोपज संग्राहकों को अधिक लाभ मिल सकेगा।
श्यामतराई की यह मंडी वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े परंपरागत व्यापार को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नियमित क्रय-विक्रय, खरीदारों की भागीदारी और आसपास के जिलों के उत्पादकों की बढ़ती पहुंच से वनोपज के विपणन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय संग्राहकों और महिला समूहों को अपने उत्पादों के लिए बाजार तलाशने में सुविधा मिल सकती है तथा धमतरी की व्यापारिक पहचान को भी नई मजबूती मिल सकती है।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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