खाली पड़ी जमीन पर बायोफ्लॉक से खुली आमदनी की नई राह, चंपा मंडल ने शुरू किया मछली पालन

रायपुर। कभी खाली पड़ी जमीन अब चंपा मंडल के परिवार के लिए आमदनी की नई उम्मीद बन गई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिले अनुदान और मत्स्य विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लेकर चंपा मंडल ने बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन शुरू किया है। 14 लाख रुपये की लागत से तैयार बायोफ्लॉक इकाई के लिए उन्हें 8 लाख 40 हजार रुपये का अनुदान मिला है। करीब चार माह पहले तालाब में डाली गई मछलियां अब बढ़ रही हैं और लगभग डेढ़ माह बाद उनकी बिक्री शुरू होने की उम्मीद है।
खाली जमीन को बनाया आय का साधन
चंपा मंडल बताती हैं कि उनकी जमीन पहले खाली पड़ी रहती थी। मत्स्य विभाग से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और बायोफ्लॉक तकनीक की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मछली पालन की दिशा में कदम बढ़ाया। विभागीय मार्गदर्शन में बायोफ्लॉक इकाई निर्माण की स्वीकृति मिली और खाली जमीन का उपयोग आयमूलक गतिविधि के लिए शुरू हुआ।
इकाई की कुल लागत 14 लाख रुपये है। योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति हितग्राहियों के लिए 60 प्रतिशत तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। चंपा मंडल को 60 प्रतिशत के अनुरूप 8 लाख 40 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।

मछलियां हो रहीं तैयार, बिक्री से बेहतर आमदनी की उम्मीद
अनुदान की सहायता से बायोफ्लॉक इकाई तैयार होने के बाद इसमें मछलियों का संचयन किया गया। चंपा बताती हैं कि करीब चार माह पहले मछलियां डाली गई थीं और अब वे अच्छी तरह बढ़ रही हैं। लगभग डेढ़ माह बाद मछलियों की बिक्री शुरू करने की तैयारी है।
उनके अनुसार बाजार में करीब 120 रुपये प्रति किलोग्राम का थोक भाव मिलने की उम्मीद है। मछलियों की बिक्री शुरू होने के बाद परिवार की आय में बढ़ोतरी की संभावना है।
परिवार को मिला अतिरिक्त आजीविका का जरिया
चंपा मंडल के परिवार के सदस्य अलग-अलग कार्यों से जुड़े हैं। ऐसे में बायोफ्लॉक से मछली पालन परिवार के लिए आय का एक अतिरिक्त जरिया बनकर उभरा है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ स्वरोजगार का नया अवसर भी तैयार हुआ है।
चंपा मंडल ने योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “सरकार की सहायता से खाली पड़ी जमीन का उपयोग मछली पालन के लिए कर पाई हूं। अब मछलियों की बिक्री शुरू होने के बाद परिवार की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।”
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से आधुनिक मत्स्य पालन को मिल रहा प्रोत्साहन चंपा मंडल जैसे हितग्राहियों के लिए उपलब्ध संसाधनों को आजीविका से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। खाली जमीन से बायोफ्लॉक इकाई तक चंपा का यह सफर स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की कहानी है।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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