धमतरी। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत ग्रामीण विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल संसाधनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन संसाधनों को ग्रामीण परिवारों की आजीविका, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बनाना है। इसी सोच को धरातल पर साकार करते हुए वीबीजीरामजी योजना के अंतर्गत धमतरी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चिखली के आश्रित ग्राम माटेगहन में हितग्राही ईश्वर/नम्मु के लिए निर्मित आजीविका डबरी अब जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि और मछली पालन के माध्यम से आय के नए अवसरों का आधार बन रही है।
माटेगहन में ग्रामीण परिवारों की आजीविका मुख्यतः कृषि पर निर्भर है। वर्षा आधारित खेती होने के कारण पर्याप्त एवं समय पर सिंचाई जल की उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रही है। खेत के समीप जल संग्रहण की सुविधा उपलब्ध होने से कृषि कार्यों को आवश्यकतानुसार पानी मिलना आसान हुआ है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हितग्राही की कृषि भूमि के समीप आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया।
2 लाख 43 हजार 760 रुपये की स्वीकृति से तैयार हुआ आजीविका संसाधन
योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण के लिए 2 लाख 43 हजार 760 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्य पूर्ण कराया गया, जिसमें 2 लाख 10 हजार 73 रुपये की राशि व्यय हुई। निर्माण पूर्ण होने के बाद यह डबरी अब केवल जल संग्रहण संरचना नहीं रही, बल्कि हितग्राही के लिए कृषि और आजीविका संवर्धन का उपयोगी संसाधन बन गई है।
डबरी में मछली पालन से बढ़ेंगे आय के अवसर
डबरी के निर्माण के बाद हितग्राही ने इसे केवल सिंचाई के साधन के रूप में उपयोग करने के बजाय आय के अतिरिक्त स्रोत से जोड़ने की पहल की है। वर्तमान में डबरी में मछली बीज डाला गया है। इससे आने वाले समय में मछली पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावना बनी है।
कृषि के साथ मछली पालन को जोड़ने से एक ही संसाधन का बहुउपयोग संभव हुआ है। इससे ग्रामीण परिवार के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।
एक एकड़ कृषि भूमि को मिला सिंचाई का सहारा
हितग्राही के पास डबरी के समीप लगभग एक एकड़ कृषि भूमि है। डबरी में संचित पानी का उपयोग इस भूमि की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता में सुविधा हुई है और वर्षा पर निर्भरता को कम करने में मदद मिल रही है।
अब खेत के समीप ही जल स्रोत उपलब्ध होने से आवश्यकता के समय सिंचाई के लिए पानी का उपयोग किया जा सकता है। इससे कृषि कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने और उपलब्ध भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां निर्मित हुई हैं।
एक डबरी, अनेक लाभ—जल संरक्षण से आजीविका संवर्धन तक
ईश्वर/नम्मु के लिए निर्मित यह आजीविका डबरी ग्रामीण विकास की उस अवधारणा को साकार करती है, जिसमें जल संरक्षण, कृषि और आजीविका संवर्धन को एक-दूसरे से जोड़ा गया है।
वर्षा जल का संग्रहण, कृषि भूमि की सिंचाई और मछली पालन—तीनों गतिविधियां एक ही जल संरचना से जुड़कर संसाधन के समग्र उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। इससे न केवल जल का संरक्षण हो रहा है, बल्कि उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन को परिवार की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर भी मिला है।
सरकारी योजना से मिला संसाधन, अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता परिवार
आजीविका डबरी का निर्माण हितग्राही परिवार के लिए केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक संभावनाओं की आधारशिला बनकर सामने आया है। सिंचाई सुविधा से कृषि को सहारा मिला है, वहीं मछली पालन से अतिरिक्त आय का मार्ग तैयार हुआ है।
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं और प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखकर आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है, तो उसका लाभ लंबे समय तक ग्रामीण परिवारों को मिल सकता है।
माटेगहन की यह पहल ग्रामीण विकास में ‘संसाधन निर्माण से आर्थिक सशक्तिकरण’ की दिशा को रेखांकित करती है। आज ईश्वर/नम्मु की आजीविका डबरी जल संरक्षण की संरचना के साथ-साथ कृषि और मछली पालन को संबल देने वाली ऐसी परिसंपत्ति बन चुकी है, जो आने वाले समय में परिवार की आय को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता की राह को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
जल बचा, खेत संवरी और आजीविका के नए अवसर जुड़े—माटेगहन की आजीविका डबरी ग्रामीण समृद्धि की इसी बदलती तस्वीर की कहानी कह रही है।










