Dhamtari: गांव के सपनों से वैश्विक नेतृत्व तक,  कृषि विद्यार्थियों को मिली सफलता की नई राह

सेवा संकल्प अभियान के तहत कृषि महाविद्यालय कुरूद में प्रेरणादायी व्याख्यान का आयोजन

धमतरी। गांव की मिट्टी से जुड़े सपनों को यदि ज्ञान, मेहनत, निरंतर सीखने और सकारात्मक सोच का साथ मिले, तो वही सपने वैश्विक मंच तक पहुंच सकते हैं। इसी संदेश के साथ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद में विद्यार्थियों के लिए “गांव के सपनों से वैश्विक नेतृत्व तक” विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बीएएसएफ के उद्योग प्रबंधक  दीपक गौराहा ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपनी शिक्षा, संघर्ष, अनुभव और व्यावसायिक यात्रा के प्रेरक प्रसंग साझा किए।

बिलासपुर जिले के एक गांव से निकलकर कृषि शिक्षा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले श्री गौराहा की जीवन यात्रा विद्यार्थियों के लिए सीख और प्रेरणा का स्रोत बनी। उन्होंने बताया कि अवसर हमेशा तैयार रूप में नहीं मिलते, बल्कि ज्ञान, कौशल, निरंतर प्रयास और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने की क्षमता से अवसरों का निर्माण किया जा सकता है। कृषि शिक्षा से अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू करने के बाद विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में कार्य करते हुए वे वर्तमान में बीएएसएफ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवं फिजी में उद्योग प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं।

कृषि शिक्षा में रोजगार से आगे उद्यमिता और नेतृत्व की संभावनाएं

अपने संबोधन में दीपक गौराहा ने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि का क्षेत्र अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। कृषि अनुसंधान, एग्री-बिजनेस, कृषि प्रबंधन, तकनीकी नवाचार, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, स्टार्टअप, डिजिटल एग्रीकल्चर और उद्यमिता सहित अनेक क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि “बड़े सपने देखिए, जिज्ञासु बने रहिए, लगातार सीखते रहिए और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहिए।” उन्होंने आत्मविश्वास, निरंतरता और नेतृत्व क्षमता को सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व एवं कौशल के निरंतर विकास पर ध्यान देने की सलाह दी।

श्री गौराहा ने कहा कि सफलता के मार्ग में चुनौतियां और असफलताएं स्वाभाविक हैं। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर अपनी रणनीति में सुधार करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को नकारात्मक सोच एवं नकारात्मक संगति से दूर रहते हुए सकारात्मक और सीखने की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गांव और अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी युवा अपने सपनों को वैश्विक ऊंचाई दे सकते हैं।

कृषि को नौकरी नहीं, अवसरों के क्षेत्र के रूप में देखें

कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी  मनोज सागर ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से कृषि को केवल शासकीय या निजी नौकरी प्राप्त करने के माध्यम के रूप में देखने के बजाय व्यवसाय, उद्यमिता, नवाचार और रोजगार सृजन के क्षेत्र के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि में उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन, कृषि यंत्र, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि, ड्रोन तकनीक, डिजिटल सेवाएं, फसलोत्तर प्रबंधन और कृषि आधारित स्टार्टअप जैसे अनेक नए क्षेत्र विकसित हो रहे हैं। कृषि विद्यार्थी अपने तकनीकी ज्ञान को व्यावहारिक कौशल और उद्यमशील सोच के साथ जोड़कर स्वयं के लिए रोजगार के साथ-साथ अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकते हैं।

विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना उद्देश्य

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों से परिचित कराने के साथ उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, नवाचार की भावना और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना रहा। विद्यार्थियों ने व्याख्यान के दौरान श्री गौराहा की व्यावसायिक यात्रा, अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव और कृषि क्षेत्र में करियर की संभावनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद के अधिष्ठाता डॉ. नवनीत राणा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि कृषि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।

दीपक गौराहा की प्रेरक जीवन यात्रा और  मनोज सागर के कृषि उद्यमिता संबंधी विचारों ने विद्यार्थियों के सामने संभावनाओं का व्यापक परिदृश्य रखा। कार्यक्रम का मूल संदेश रहा कि “जड़ों से जुड़े रहकर भी सपनों की उड़ान वैश्विक हो सकती है।” कृषि शिक्षा से जुड़े युवा यदि ज्ञान, कौशल, तकनीक और उद्यमिता को साथ लेकर आगे बढ़ें, तो वे न केवल अपने भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए रोजगार सृजन और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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