सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पांच पूर्व न्यायाधीशों का एक स्वतंत्र आयोग गठित, SIR की करेगा जांच

नई दिल्ली। SIR ने देश में 13 करोड़ों लोगों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया है और जिसमें गड़बड़ियों को लेकर पूरे देश में बवाल मचा है। उसकी वैधता और उसके प्रभावों की जांच के लिए ‘लॉयर्स एसोसिएशन्स फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पांच पूर्व न्यायाधीशों का एक स्वतंत्र आयोग गठित किया है। यह आयोग SIR की वैधता और उसके प्रभाव की जांच करेगा।

इस आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर (पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश) हैं। इसमें न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक (पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश), न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट), न्यायमूर्ति रेखा शर्मा (पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट न्यायाधीश) और न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश (पूर्व पटना हाईकोर्ट न्यायाधीश) शामिल होंगे।

आयोग का गठन SIR की रूपरेखा उसे लागू करने के तरीके और उसके परिणामों को लेकर नागरिकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के जवाब में किया गया है।आयोग जाँच करेगा कि SIR की प्रक्रिया संविधान और कानून के अनुरूप है या नहीं, और इससे पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर क्या असर पड़ा। आयोग देशभर में जनसुनवाई, मतदाता सूची से नाम जोड़ने-काटने के आँकड़ों का विश्लेषण और कानूनी समीक्षा करेगा।

आयोग का मुख्य सवाल यह होगा कि क्या SIR के दौरान हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, और क्या अपात्र प्रविष्टियों को सही प्रक्रिया के तहत हटाया गया।

आयोग केवल SIR की प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा नहीं करेगा, बल्कि यह भी देखेगा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन हुआ या नहीं।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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