स्थानीय उद्योगों के विकास, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर
धमतरी। स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार की नई संभावनाओं से जोड़ने, ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में जनपद पंचायत मगरलोड में निर्यात प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, धमतरी के तत्वावधान तथा CSIDC के अंतर्गत संचालित RAMP योजना के तहत कृषि विकास सहकारी समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 100 से अधिक कृषकों, युवा उद्यमियों, महिला प्रतिनिधियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत पांच आवेदन भी किए गए।
कार्यक्रम में जनपद पंचायत मगरलोड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोहित बोरझा, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.के. शांडिल्य तथा VB-G RAM G के PO भावेश नाथ योगी सहित आशीष साहू एवं क्षेत्र के अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
स्थानीय उत्पादों को व्यवसाय में बदलने पर जोर
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कृषि संसाधनों और स्थानीय उत्पादों को आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए कृषकों एवं युवाओं को प्रोत्साहित करना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया गया कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, गुणवत्ता में सुधार, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने से उनकी व्यावसायिक उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है। इससे किसान केवल कच्चे कृषि उत्पादों की बिक्री तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की संभावनाएं तलाश सकते हैं।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों की स्थापना, मौजूदा व्यवसायों का विस्तार और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। उन्होंने कृषकों, युवाओं और महिला समूहों को शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ लेने तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
निर्यात, ब्रांडिंग और शासकीय योजनाओं की दी जानकारी
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, धमतरी के DRP एवं मास्टर ट्रेनर डॉ. संदीप मेश्राम ने प्रतिभागियों को निर्यात प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं, उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, नवाचार तथा ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) योजना की जानकारी दी। उन्होंने आयात-निर्यात कोड (IEC) के पंजीयन, व्यवसाय विस्तार की प्रक्रिया और निर्यात के लिए आवश्यक प्रारंभिक तैयारियों के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ शासन की औद्योगिक नीति, केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न औद्योगिक योजनाओं, अनुदान और सब्सिडी के प्रावधानों तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) पर विशेष जानकारी दी गई। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, स्थानीय कृषि उपज से उपयोगी उत्पाद तैयार करने तथा छोटे उद्यमों को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
स्वरोजगार से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान PMFME योजना के अंतर्गत पांच आवेदन किए जाना स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही। ऐसी योजनाओं की जानकारी से इच्छुक कृषकों, युवाओं और महिला उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने तथा उपलब्ध वित्तीय सहायता और अन्य प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि आधारित लघु उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन जैसी गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इनसे कृषि उपज का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने के साथ ही परिवहन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। महिला स्व-सहायता समूहों और युवा उद्यमियों की भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार भी संभव है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, बाजार की जरूरतों को समझने, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने तथा व्यवसाय को स्थानीय बाजार से आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में जानकारी मिली। स्थानीय संसाधनों, कौशल और उद्यमशीलता का समन्वय कर मगरलोड क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में यह कार्यक्रम उपयोगी रहा।









