मनरेगा में अनियमितता पर सरपंच की बर्खास्तगी की मांग करेंगे योगेन्द्र देवांगन

JCB से खुदाई कर मुरुम बेचने का आरोप, गरीब मजदूरों के रोजगार पर डाका डालने वालों के खिलाफ FIR की मांग

धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की कार्रवाई, सरकारी राशि की वसूली और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बुधवार को कलेक्टर धमतरी से करेंगे मुलाकात

धमतरी/कुरूद। ग्राम पंचायत सिर्री में मनरेगा के निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं, मस्टर रोल में बिना काम किए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर भुगतान कराए जाने तथा JCB से खुदाई कर मुरुम निकालने और उसे बेचे जाने के आरोपों को लेकर युवा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र देवांगन ने प्रशासन के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया है। देवांगन बुधवार को कलेक्टर धमतरी से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने तथा ग्राम पंचायत के सरपंच के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की कार्रवाई की मांग करेंगे।

देवांगन ने कहा कि यह मामला केवल सरकारी राशि की कथित अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब मजदूरों के रोजगार, उनके परिवारों की आजीविका और गांव के विकास से भी जुड़ा हुआ है। यदि मनरेगा के अंतर्गत मजदूरों से काम कराने के बजाय JCB मशीन से खुदाई कराई गई और निकाले गए मुरुम को बेचने का कार्य हुआ है, तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि खुदाई किसकी अनुमति से हुई, मुरुम कहां ले जाया गया, उसे बेचने से प्राप्त राशि किसके पास गई और संबंधित कार्यों में सरकारी नियमों का पालन किया गया या नहीं।

गरीब मजदूरों के रोजगार पर चोट, मशीनों से काम कराने के आरोप की जांच जरूरी

योगेन्द्र देवांगन ने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। ऐसे में यदि मजदूरों को काम देने के बजाय JCB से खुदाई कराई गई, तो यह जांच का विषय है कि इससे कितने मजदूर रोजगार से वंचित हुए और उनकी मजदूरी के अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ा।

उन्होंने कहा, “गरीब मजदूर इस उम्मीद में रहते हैं कि गांव में मनरेगा का काम चलेगा तो उनके परिवार का चूल्हा जलेगा, बच्चों की पढ़ाई होगी और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होंगी। लेकिन यदि मजदूरों को काम देने के बजाय मशीनों का इस्तेमाल किया गया, तो उन परिवारों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए होंगे। मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित करने के किसी भी मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता।”

देवांगन ने यह भी कहा कि यदि काम निर्धारित अवधि तक जारी रहता और मजदूरों को नियमानुसार रोजगार मिलता, तो उन्हें अतिरिक्त दिनों की मजदूरी प्राप्त हो सकती थी। उनके अनुसार, यदि लगभग 10 दिन और काम चलने की संभावना थी, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए कि काम समय से पहले क्यों समाप्त हुआ, मजदूरों को कितने दिन रोजगार मिला और क्या उन्हें नियमानुसार काम का अवसर दिया गया। उन्होंने मांग की कि संबंधित मजदूरों के बयान लेकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

JCB से खुदाई और मुरुम की बिक्री के आरोप पर उठाए सवाल

देवांगन ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य से जुड़े मामले में JCB मशीन से खुदाई कर मुरुम निकालने और उसे बेचने की शिकायतों की भी जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि खुदाई की अनुमति, मुरुम के परिवहन, बिक्री, रॉयल्टी अथवा अन्य लागू शुल्क, वाहन एवं परिवहन संबंधी अभिलेखों तथा प्राप्त राशि के उपयोग की पड़ताल की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकारी या पंचायत की भूमि से निकाले गए मुरुम का नियम विरुद्ध उत्खनन अथवा विक्रय हुआ है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसमें किन व्यक्तियों की भूमिका रही और उससे किसी व्यक्ति को अनुचित आर्थिक लाभ तो नहीं मिला। दोष सिद्ध होने पर संबंधित कानूनों के अंतर्गत जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच पत्र में भी मस्टर रोल संबंधी अनियमितता का उल्लेख

देवांगन ने बताया कि ग्राम पंचायत सिर्री में दोतेसरी तालाब नवीनीकरण एवं रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत कुरूद द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में जांच के दौरान बिना कार्य किए मजदूरों की उपस्थिति मस्टर रोल में दर्ज कर भुगतान कराए जाने संबंधी अनियमितता का उल्लेख किया गया है।

उक्त पत्र के अनुसार, सरपंच पर ₹7,000, तकनीकी सहायक पर ₹2,000 तथा रोजगार सहायक पर ₹1,000 की शास्ति लगाए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त ₹25,317 की वसूली के लिए कार्रवाई का भी उल्लेख है।

देवांगन ने कहा कि यदि जांच में मस्टर रोल में गलत उपस्थिति दर्ज कर भुगतान कराने की अनियमितता सामने आई है, तो केवल शास्ति लगाने तक सीमित रहने के बजाय यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी राशि की वसूली वास्तव में हुई या नहीं, भुगतान किस प्रक्रिया से हुआ और इसमें किन-किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

कलेक्टर से इन प्रमुख मांगों को लेकर सौंपेंगे ज्ञापन

योगेन्द्र देवांगन बुधवार को कलेक्टर धमतरी को ज्ञापन सौंपकर निम्नलिखित मांगें करेंगे—

1. ग्राम पंचायत सिर्री के सरपंच के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की कार्रवाई के लिए नियमानुसार प्रक्रिया शुरू की जाए।
2. दोतेसरी तालाब नवीनीकरण एवं रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्य में मस्टर रोल, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और भुगतान अभिलेखों की विस्तृत जांच कराई जाए।
3. JCB से खुदाई कर मुरुम निकालने और उसे बेचे जाने के आरोपों की जांच कराई जाए तथा उत्खनन, परिवहन, बिक्री और प्राप्त राशि से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की जाए।
4. यह पता लगाया जाए कि मनरेगा के तहत मजदूरों को काम देने के स्थान पर मशीनों का इस्तेमाल हुआ या नहीं और यदि हुआ, तो किन परिस्थितियों में तथा किसकी अनुमति से हुआ।
5. प्रभावित मजदूरों के बयान दर्ज कर यह स्पष्ट किया जाए कि उन्हें कितने दिन काम मिला, क्या वे रोजगार से वंचित हुए और उनके वैधानिक अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ा।
6. ₹25,317 की प्रस्तावित वसूली की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए तथा राशि जमा होने की स्थिति में उसका प्रमाण उपलब्ध कराया जाए।
7. जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने और लागू कानूनों के तहत वैधानिक कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए।
8. जांच निष्पक्ष रखने के लिए संबंधित मस्टर रोल, भुगतान विवरण, तकनीकी मूल्यांकन, कार्यस्थल के अभिलेख और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए तथा शिकायतकर्ता को कार्रवाई की लिखित जानकारी दी जाए।

“गरीबों के रोजगार और सरकारी धन के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

योगेन्द्र देवांगन ने कहा कि सरकारी खजाना किसी की निजी संपत्ति नहीं है और मनरेगा की राशि ग्रामीण गरीबों के हित में खर्च होनी चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर मजदूरों के नाम का गलत इस्तेमाल हुआ, सरकारी धन का अनुचित भुगतान हुआ या मुरुम के उत्खनन एवं विक्रय में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो दोषियों की जवाबदेही तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सरपंच सहित किसी भी संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई का निर्णय जांच, उपलब्ध साक्ष्य और कानून के अनुसार होना चाहिए। लेकिन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों को किसी भी स्तर पर अनुचित संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

देवांगन ने स्पष्ट किया कि बुधवार को कलेक्टर धमतरी से मुलाकात के दौरान वे सरपंच के विरुद्ध धारा 40 के तहत कार्रवाई, JCB से खुदाई एवं मुरुम की बिक्री के आरोपों की जांच, मजदूरों के रोजगार के अधिकारों की पड़ताल, सरकारी राशि की वसूली और साक्ष्यों के आधार पर FIR दर्ज कराने की मांग प्रमुखता से उठाएंगे।

उन्होंने कहा, “यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत द्वेष की नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के सम्मान, उनके रोजगार के अधिकार, गांव के विकास और जनता के पैसे की सुरक्षा की लड़ाई है। प्रशासन को निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई कर जनता का विश्वास बनाए रखना चाहिए।”

 

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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