रायपुर। कृषि क्षेत्र में नवाचार और विशेष रूप से सब्जी उत्पादन के माध्यम से किसानों को प्रेरित करने के प्रयासों के लिए धमतरी जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा को प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वन मंत्री केदार कश्यप, भाजपा संघठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर के हाथों ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
मंगलवार को राजधानी रायपुर के सर्किट हाउस, सिविल लाइन में आयोजित समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए उत्कृष्ट किसानों को भी सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर धमतरी जिले के नगरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सांकरा के आश्रित ग्राम मसान डबरा में 34 कमार जनजातीय परिवारों के लिए निर्मित आवासीय कॉलोनी की विकास यात्रा पर आधारित मैगजीन ‘पीएम जनमन योजना : आवासीय कॉलोनी मसान डबरा (सांकरा)- बदलाव की कहानी’ का विमोचन भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव, वन मंत्री केदार कश्यप, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर सहित मनहरण पांडेय स्मृति संस्थान के प्रमुखजनों के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मैगजीन के महत्व पर कहा कि, जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक सफलता तब दिखाई देती है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए। वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि, जनजातीय परिवारों के जीवन में आए बदलाव को दस्तावेज के रूप में सामने लाने वाले ऐसे प्रयास विकास की उपलब्धियों को समझने और दूसरे क्षेत्रों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अरुण सार्वा ने सम्मान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान’ उनके लिए गौरव के साथ किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और बेहतर ढंग से निभाने की प्रेरणा है। कृषि में नवाचार और सब्जी उत्पादन के माध्यम से किसानों को नई दिशा देने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि मसान डबरा में 34 कमार परिवारों के लिए आवासीय कॉलोनी का निर्माण केवल घर बनाने तक सीमित प्रयास नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य परिवारों को सुरक्षित आवास, बेहतर सुविधाएँ और सम्मानजनक जीवन का आधार उपलब्ध कराना है। इस यात्रा में संकल्प, सहयोग और जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि मैगजीन के माध्यम से मसान डबरा में हुए बदलाव को स्थायी दस्तावेज का स्वरूप मिलना संतोष की बात है।









