केकराखोली और चर्रा में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, किसानों, जनप्रतिनिधियों एवं एफपीसी सदस्यों से किया सीधा संवाद
ग्रामीण आजीविका, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और परिवारों के उपभोग व्यय की स्थिति को करीब से समझा
धमतरी। ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्रामीण परिवारों की आजीविका, आर्थिक गतिविधियों तथा पारिवारिक उपभोग व्यय की वास्तविक स्थिति को समझने के उद्देश्य से भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के पूर्व सचिव अमरजीत सिन्हा ने धमतरी जिले के मगरलोड एवं कुरुद विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम केकराखोली और ग्राम पंचायत चर्रा में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, पंचायत राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों, प्रगतिशील कृषकों, किसानों तथा किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) के सदस्यों से सीधा संवाद कर ग्रामीण जीवन, आय के स्रोतों और स्थानीय विकास की स्थिति की जानकारी प्राप्त की।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जयंत नाहटा ने पूर्व सचिव अमरजीत सिन्हा को जिले में ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषि एवं आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा किसान उत्पादक कंपनियों की गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने जिले में ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोतों, आजीविका के अवसरों और विभिन्न शासकीय योजनाओं से मिल रहे लाभों की जानकारी भी दी।
यह भ्रमण भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा संचालित पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) के अंतर्गत तकनीकी विशेषज्ञ समूह के क्षेत्रीय दौरे का हिस्सा था। सर्वेक्षण के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी परिवारों द्वारा खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं तथा विभिन्न सेवाओं पर किए जाने वाले व्यय से संबंधित विश्वसनीय आंकड़े संकलित किए जाते हैं। ये आंकड़े देश में उपभोग के स्वरूप, जीवन-स्तर और आर्थिक परिस्थितियों के आकलन के साथ विकास योजनाओं के निर्माण एवं नीतिगत निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
मगरलोड विकासखंड के ग्राम केकराखोली में श्री सिन्हा ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, प्रगतिशील कृषकों और एफपीसी सदस्यों के साथ चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण आजीविका के साधनों, कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों, महिला समूहों की भूमिका तथा किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से किसानों को मिलने वाले अवसरों के संबंध में जानकारी ली। संवाद के दौरान यह समझने पर जोर दिया गया कि ग्रामीण परिवारों की आय के प्रमुख स्रोत क्या हैं, कृषि एवं अन्य गतिविधियां उनकी आर्थिक स्थिति को किस प्रकार प्रभावित करती हैं तथा उनकी दैनिक आवश्यकताओं और उपभोग संबंधी प्राथमिकताओं में किस प्रकार बदलाव आ रहे हैं।
कुरुद विकासखंड के ग्राम पंचायत चर्रा में भी श्री सिन्हा ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण परिवारों की आवश्यकताओं, आजीविका के साधनों, कृषि गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आर्थिक अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से ग्रामीणों के अनुभवों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया गया। इस दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी, सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका तथा कृषि एवं गैर-कृषि गतिविधियों से परिवारों को मिलने वाली आय जैसे विषय भी महत्वपूर्ण रहे।
पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े परिवारों के खर्च के स्वरूप, उपभोग के रुझानों और जीवन-स्तर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराते हैं। इनका उपयोग आर्थिक एवं सांख्यिकीय विश्लेषण, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से संबंधित आकलन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और मूल्यांकन में किया जाता है। इस दृष्टि से क्षेत्रीय भ्रमण और ग्रामीणों के साथ प्रत्यक्ष संवाद सर्वेक्षण के निष्कर्षों को स्थानीय परिस्थितियों के संदर्भ में समझने तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं का व्यापक आकलन करने में सहायक होते हैं।








