मनीष सरवैया @ महासमुंद। जिले के ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए शासन भले ही पारदर्शिता के दावे कर रहा हो, लेकिन महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोमा से सामने आया मामला पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां पदस्थ रोजगार सहायक सुभाषिनी सोनी ने सरपंच प्रतिनिधि एवं कुछ पंच प्रतिनिधियों पर वीबी-जी राम जी योजना के कार्यों में कथित तौर पर फर्जी हाजिरी दर्ज कराकर सरकारी राशि निकालने के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। रोजगार सहायक ने इस संबंध में जनपद पंचायत बागबाहरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जिला पंचायत महासमुंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
रोजगार सहायक सुभाषिनी सोनी की शिकायत के अनुसार, सरपंच प्रतिनिधि एवं कुछ पंच प्रतिनिधियों द्वारा कथित तौर पर उन पर ऐसे मजदूरों की हाजिरी दर्ज करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिन्होंने वास्तव में कार्यस्थल पर काम नहीं किया है। आरोप है कि फर्जी उपस्थिति दर्ज कराकर सरकारी राशि निकालने के लिए रोजगार सहायक पर दबाव बनाया जा रहा है। जब रोजगार सहायक ने कथित अनियमितता में सहयोग करने से इनकार किया तो उन्हें फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है, रोजगार सहायक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि रोजगार गारंटी के तहत स्वीकृत कार्यों में मजदूरों को जाने से मना किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर उन ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा, जिनकी आजीविका रोजगार गारंटी योजना के कार्यों पर निर्भर है।







