विराट हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए देवकर साहेब , कहा- समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाना ही संत जीवन की सच्ची सफलता

राजिम। खिसोरा गांव के देवकर साहेब ने 16 वर्ष की उम्र में संन्यास ले लिया था। शनिवार को वे सोनपैरी स्थित आश्रम में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए।

पिछले 20 वर्षो से उनका पूरा जीवन समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक जागरण और गौ माता की सेवा को समर्पित है। देवकर साहेब का मानना है कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा, प्रकृति की रक्षा और अच्छे संस्कारों का प्रसार ही वास्तविक धर्म है। यही कारण है कि वे लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को सदाचार, संयम और सेवा का संदेश देते हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान पौधों की सेवा और पौधारोपण अभियान है। वे स्वयं पौधे लगाते हैं, उनकी नियमित देखभाल करते हैं और लोगों को भी अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करते हैं।

उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। पेड़ केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि जीवन को भी सुरक्षित और समृद्ध बनाते हैं। देवकर साहेब अपने प्रवचनों में संत कबीरदास के दोहों और जीवन-दर्शन का उल्लेख करते हुए लोगों को सत्य, प्रेम, करुणा, परोपकार और अहंकार त्यागने की सीख देते हैं। उनका कहना है कि कबीर का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था। यदि समाज कबीर के विचारों को अपनाए तो अनेक सामाजिक बुराइयों का स्वत: अंत हो सकता है। वे विशेष रूप से युवाओं से नशे, हिंसा और बुरी संगति से दूर रहने की अपील करते हैं तथा शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा से जुड़ने का आह्वान करते हैं।

सोनपैरी स्थित आश्रम में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन के सफल आयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक सहित अनेक संत, धर्माचार्य और जनप्रतिनिधियो के बीच सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकात्मता का संदेश दिया। आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ उन्होंने जनसेवा को भी अपने जीवन का ध्येय बनाया। उनका विश्वास है कि राष्ट्र की सेवा ही सर्वोच्च साधना है, और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाना ही संत जीवन की सच्ची सफलता है।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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