Dhamtari : जल्द शुरू होगा जिले का पहला दुग्ध प्रसंस्करण केन्द्र

गातापार के प्रसंस्करण केन्द्र का कलेक्टर ने किया निरीक्षण

धमतरी। कुरूद विकासखण्ड के गांतापार ग्राम पंचायत में स्थापित किए गए मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट के जल्द चालू होने की उम्मीद बढ़ गई है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस प्रसंस्करण केन्द्र का सीईओ जिला पंचायत रोमा श्रीवास्तव और पशु पालन विभाग तथा आजीविका मिशन के अधिकारियों के साथ पिछले दिनों अवलोकन किया।

इस प्रसंस्करण केन्द्र के चालू हो जाने से क्षेत्र के दूध उत्पादक पशुपालकों और महिला स्व सहायता समूहों की सदस्यों को रोजगार के वैकल्पिक अवसर मिलेंगे। कलेक्टर ने इस दौरान प्रसंस्करण केन्द्र में लगाई गई बडी़-बड़ी मशीनों और अन्य उपकरण का भी अवलोकन किया और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी पशुपालन विभाग के अधिकारियों से ली। इस दौरान कलेक्टर ने दुग्ध उत्पादन और वितरण से जुड़ी स्थानीय स्व सहायता समूह की महिलाओ से भी बात की। उन्होंने इस संयंत्र को शुरू करने के लिए तकनीकी रूप से योग्य टेक्निशियन की सेवाएं के भी निर्देश अधिकारियों को दिए।

कुरूद विकासखण्ड के रामपुर क्लस्टर के गातापार में रूर्बन मिशन, मनरेगा जैसी योजनाओं के कनवर्जेंस से मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट लगाई गई है। इस यूनिट में दूध के शीतलीकरण, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के लिए जरूरी मशीनें और उपकरण भी स्थापित किए गए हैं। तीन हजार लीटर प्रतिदिन दूध प्रोसेसिंग क्षमता के इस यूनिट में दूध के पैकेजिंग के साथ-साथ पनीर, घी, दही, खोवा जैसे अन्य दुग्ध उत्पाद तैयार करने की भी सुविधा है। यहां रॉ मिल्क रिसेप्शन बॉक्स, मिल्क केन वॉशर, वैन बैलेंस, डम्प टैंक, क्रीम सेपरेटर, चीलर, होमोजिनाईजर, पॉश्चराईजर जैसे उपकरण भी उपलब्ध है। प्रसंस्करण केन्द्र में कोल्ड स्टोरेज एरिया, पैकेजिंग एरिया, प्रोडक्ट मैनुफैक्चरिंग एरिया के साथ-साथ यूटिलिटी एरिया की भी व्यवस्था की गई है।

इस दुग्ध संयंत्र को संचालित करने के लिए क्षेत्र के दूध उत्पादक पशु पालकों को और महिला स्वसहायता समूहों का सहयोग लिया जाएगा। क्षमता अनुसार आसपास के दूध उत्पादक पशु पालकों से सम्पर्क कर दूध इकट्ठा कर प्रोसेसिंग यूनिट में लाया जाएगा और उसे प्रोसेस कर पैकेजिंग के बाद खुले बाजार में बेचा जाएगा। इसके लिए धमतरी शहर और भखारा में वितरण केन्द्र भी स्थापित करने की योजना है। इस संयंत्र के शुरू हो जाने से क्षेत्र के साथ-साथ जिले में भी दुग्ध व्यवसाय को नई दिशा मिलेगी। स्वसहायता समूहों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही वे एक तकनीकी व्यवसाय में पारंगत हो सकेंगी।

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