प्रदीप साहू @ नगरी। मोदी सरकार के 15 अक्टूबर से यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के फैसले को आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनोज साक्षी ने जन-विरोधी और विश्वासघात करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आम जनता, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर सीधा हमला है।
मनोज साक्षी ने कहा कि पहले तो मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया के नाम पर पूरे देश में ढोल पीटा, लोगों को कैशलेस व्यवस्था की आदत डाली, हर मजदूर, किसान, छात्र और गृहणी के हाथ में यूपीआई की लत लगा दी। जब देश के 55 करोड़ से ज्यादा नागरिक इस व्यवस्था के आदी हो गए, तब सरकार ने अपना असली रंग दिखा दिया और उसी डिजिटल लेनदेन पर टैक्स का हंटर चलाना शुरू कर दिया। यह जनता के भरोसे की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।
सरकार के दावों की पोल खोलते हुए मनोज साक्षी ने आंकड़े रखे। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है कि यह शुल्क केवल 2000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर लगेगा और आम उपभोक्ता प्रभावित नहीं होगा। जबकि सच्चाई यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश में कुल 314 लाख करोड़ रुपये के यूपीआई ट्रांजेक्शन में से 207 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ऊपर के ही हैं। यानी मूल्य के हिसाब से दो-तिहाई लेनदेन इस दायरे में आएंगे। सरकार आंकड़ों की बाजीगरी कर जुमलेबाजी कर रही है।
जिला अध्यक्ष ने बताया कि 15 अक्टूबर से लागू हो रहा 0.4 प्रतिशत का एमडीआर छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए आफत बनेगा। 3000 रुपये के भुगतान पर 12 रुपये, 50 हजार पर 200 रुपये और 75 हजार से ऊपर पर 300 रुपये तक की कटौती व्यापारी की कमाई से होगी। कोई भी व्यापारी यह घाटा अपनी जेब से नहीं सहेगा, अंत में वह दाम बढ़ाकर वसूलेगा। इसका पूरा बोझ अंततः आम ग्राहक पर ही पड़ेगा। सरकार भले ही मॉनिटरिंग और सख्ती का दावा करे, लेकिन बाजार का सच यही है कि महंगाई का बोझ जनता पर ही आएगा।
उन्होंने कहा कि आज जब रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दाल-तेल और हर जरूरी सामान के दाम आसमान पर हैं, तब यह नया शुल्क जनता की जेब पर खुला डाका है। मोदी सरकार चंद बड़े बैंकों और वित्तीय घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए 15 हजार करोड़ से ज्यादा की वसूली का जाल बुन रही है, जबकि 95 प्रतिशत लेनदेन फ्री होने का झूठा प्रचार कर रही है।
मनोज साक्षी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस जन-विरोधी फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी और व्यापारियों तथा आम नागरिकों के हितों की रक्षा करेगी। सरकार को यह तानाशाही फैसला वापस लेना ही होगा।










