मनीष सरवैया वरिष्ठ पत्रकार महासमुंद। महासमुंद जिले में गरीब और मजबूर परिवारों की आर्थिक तंगी को कथित तौर पर अपना हथियार बनाकर उन्हें कर्ज के जाल में फंसाने, दूसरे राज्यों में भेजकर बंधुआ मजदूरी कराने और नाबालिगों से बाल मजदूरी कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का महासमुंद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अस्पताल से मिले एक मेमो के बाद शुरू हुई जांच ने मानव तस्करी के कथित ऐसे सिंडिकेट की परतें खोल दीं, जिसके तार छत्तीसगढ़, ओडिशा और दूसरे राज्यों तक जुड़े होने का पुलिस ने दावा किया है।
पुलिस के अनुसार 21 सितंबर को एक अस्पताल से मिले मेमो में नाबालिग पीड़िता के शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। पीड़िता और उसके परिजनों से पूछताछ के बाद जांच आगे बढ़ी तो कथित मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी का पूरा नेटवर्क सामने आया।
पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी बताए जा रहे ठेकेदार मुकेश चंद्राकर ने जनवरी 2026 में पीड़ित परिवार को ₹40 हजार एडवांस देकर कथित तौर पर कर्ज के जाल में फंसाया और बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश के एक ईंट-भट्ठे में भेजा गया। पुलिस का आरोप है कि वहां परिवार की आवाजाही सीमित कर लंबे समय तक काम कराया गया। इसी दौरान 15 वर्षीय नाबालिग से भी कथित तौर पर बाल मजदूरी कराई गई। पुलिस ने ईंट-भट्ठे के जेसीबी चालक पर नाबालिग के शारीरिक शोषण का आरोप भी दर्ज जांच में लिया है।
महासमुंद पुलिस ने ओडिशा पुलिस के सहयोग से नेटवर्क से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर सर्च और रेड कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार इस दौरान ₹1,48,54,750 नगद बरामद हुए। साथ ही मजदूर पलायन के रजिस्टर-डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्टगेज स्टांप दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन भी जब्त की गई।
पुलिस ने मुकेश चंद्राकर, नसीम बानो उर्फ लता सबर, मनीष गुप्ता, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पियुष अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार बरामद दस्तावेजों में बड़ी संख्या में मजदूरों के दूसरे राज्यों में भेजे जाने के रिकॉर्ड मिले हैं। मोबाइल सीडीआर और बैंक खातों की जांच जारी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी जांच पहुंचाई जाएगी।
मामला थाना खल्लारी अपराध क्रमांक 104/2026 में दर्ज है और पुलिस ने BNS की धाराओं 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध की धारा 111 के तहत कार्रवाई की है।
अस्पताल के एक मेमो से शुरू हुई जांच अब करोड़ों की नकदी, मजदूर पलायन के रिकॉर्ड और कथित मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। अब निगाहें जांच के अगले खुलासे पर हैं—आखिर इस कथित सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके पीछे कितने चेहरे छिपे हैं।










